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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 80
दुर्लभं सर्वलोकेषु कुलाचार्यस्य दर्शनम् । सुपाकेनैव पुण्यानां लभ्यते नान्यथा प्रिये ॥
हे प्रिये! सारे लोकों में कुलाचार्य का दर्शन दुर्लभ है। पुण्यों के सुफलित होने पर ही उसका दर्शन मिलता है, अन्यथा नहीं।
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