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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 77
यो भवेत् कुलतत्त्वज्ञः कुलशास्त्रविशारदः । कुलार्चनरतः स स्यात् कौलिको नापरः प्रिये ॥
जो कुलतत्त्व का ज्ञाता है, कुलशास्त्र का मर्मज्ञ है, वह कुलार्चन में तत्पर रहता है और हे प्रिये! वही कौलिक है, अन्य नहीं।
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