कुल की प्रशंसा होने पर वे रोमाञ्चित हो उठते हैं, उनका स्वर गद्गद हो जाता है और आनन्दाश्रु गिरने लगता है। हे देवि! ये ही उत्तम कौलिक कहे गये हैं।
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