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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 75
कीर्त्यमाने कुले येषां रोमाञ्चो गद्गदस्वरः । आनन्दाश्शु पतेद्देवि कथिताः कौलिकोत्तमाः ॥
कुल की प्रशंसा होने पर वे रोमाञ्चित हो उठते हैं, उनका स्वर गद्‌गद हो जाता है और आनन्दाश्रु गिरने लगता है। हे देवि! ये ही उत्तम कौलिक कहे गये हैं।
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