अमदक्रोधदम्भाशाहङ्काराः सत्यवादिनः ।
कौलिकेन्द्रा ह्यचपला ये नेन्द्रियवशानुगाः ॥
मद, क्रोध, दम्भ, आशा, अहङ्कार से हीन, सत्यवादी कौलिकेन्द्र इन्द्रिय के वशवर्ती न होकर जितेन्द्रिय होते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।