निवृत्तदुःखसन्तुष्टा निर्द्वन्द्वा गतमत्सराः ।
कुलज्ञानरताः शान्तास्त्वद्भक्तास्ते च कौलिकाः ॥
उत्तम कौलिक के लक्षण-दुःखों से निवृत्त, सन्तुष्ट, निर्द्वन्द्व और मत्सरहीन होकर जो कुलज्ञान में तन्मय, शान्त और आपके भक्त होते हैं, वे 'कौलिक' हैं।
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