नदीं वक्रामृजुं कर्तुं निरोधुं तत्प्रवाहकम् ।
स्वेच्छाविहारिणं शान्तं को वा वारयितुं क्षमः ॥
टेढ़ी नदी को सीधा करना, उसके प्रवाह को रोकना सम्भव नहीं है। इसी प्रकार स्वेच्छा से बिहार करने वाले शान्त योगी को मना करने में कोई समर्थ नहीं है।
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