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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 7
अनन्तं गतभारूपं सत्तामात्रमगोचरम् । मनसा मात्रसम्वेद्यं तज्ज्ञानं ब्रह्मसंज्ञितम् ॥
सत्ता मात्र उस अदृश्य, अवस्था हीन जिस रूप का केवल मन से अनुभव होता है, उस ज्ञान को 'ब्रह्म' कहा गया है।
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