अलक्ष्यो हि यथा लोके व्योम्नि चन्द्रार्कयोगतः ।
नक्षत्राणां ग्रहाणाञ्च तथा वृत्तन्तु योगिनाम् ॥
इस संसार में वे अलक्ष्य ही रहते हैं, जैसे आकाश में सूर्य चन्द्र की गति। नक्षत्रों और ग्रहों के समान ही कुलयोगियों का हाल है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।