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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 61
अलक्ष्यो हि यथा लोके व्योम्नि चन्द्रार्कयोगतः । नक्षत्राणां ग्रहाणाञ्च तथा वृत्तन्तु योगिनाम् ॥
इस संसार में वे अलक्ष्य ही रहते हैं, जैसे आकाश में सूर्य चन्द्र की गति। नक्षत्रों और ग्रहों के समान ही कुलयोगियों का हाल है।
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