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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 56
निर्गुणाः सगुणायन्ते अकुलं सुकुलायते । अधर्माश्चापि धर्मन्ति कौलिकानां कुलेश्वरि ॥ मृत्युर्वैद्यायते देवि साक्षात् स्वर्गायते गृहम् । पुण्यायन्तेऽङ्गनासङ्गाः कौलिकानां कुलेश्वरि ॥
गुणहीन गुणी, अकुलीन कुलीन और अधर्मी भी कौलिकों के लिये हे कुलेश्वरि! धर्मवान् बन जाते हैं। मृत्यु वैद्य बन जाती है, घर साक्षात् स्वर्ग हो जाता है और हे कुलेश्वरि! स्त्रियों का सङ्ग कौलिकों के लिये पुण्यकारक हो जाता है।
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