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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 53
अनभिज्ञा अभिज्ञन्ति दरिद्रा धनयन्ति च । विनष्टा अपि वर्द्धन्ते कौलिकाः कुलनायिके ॥
अनभिज्ञ विशेषज्ञ होता है, दरिद्र धनी है और हे कुलेश्वरि! नाशवान् होते हुये भी कौलिक वृद्धि को प्राप्त करते हैं।
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