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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 51
अनाचारः सदाचारस्त्वकार्य कार्यमुत्तमम् । असत्यमपि सत्यं स्यात् कौलिकानां कुलेश्वरि ॥ अपेयमपि पेयं स्यादभक्ष्यं भक्ष्यमेव च। अगम्यमपि गम्यं स्यात् कौलिकानां कुलेश्वरि ॥
अनाचार सदाचार है, अकार्य ही उत्तम कार्य है, हे कुलेश्वरि! असत्य भी कौलिकों के लिये सत्य होता है। अपेय भी पेय है, अभक्ष्य भक्ष्य है और हे कुलेश्वरि! अगम्य भी कौलिकों के लिये गम्य होता है।
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