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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 49
यावदासवगन्धः स्यात् पशुः पशुपतिः स्वयम् । विनालिमांसगन्धेन साक्षात् पशुपतिः पशुः ॥
जब तक मद्य की गन्ध है, तब तक पशु साधक स्वयं पशुपति स्वरूप है। मद्य मांस की सुगन्ध के बिना साक्षात् पशुपति भी पशु के समान होते हैं।
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