आमिषासवसौरभ्यहीनं यस्य मुखं भवेत् ।
प्रायश्चित्ती स वर्ज्यश्च पशुरेव न संशयः ॥
मांस और मद्य की सुगन्धि से जिसका मुख रहित है, वह प्रायश्चित का भागी होता है। उसका त्याग करे, वह 'पशु' ही है, इसमें सन्देह नहीं।
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