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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 43
यथा पङ्ग्वन्धबधिरक्लीबोन्मत्तजडादयः । निवसन्ति कुलेशानि तथा योगी च तत्त्ववित् ॥
हे कुलेशानि! लँगड़े, अन्धे, बहरे, नपुंसक, पागल और मूर्खादि के समान रहता है वह तत्त्वज्ञ 'योगी' है।
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