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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 39
जीवः शिवः शिवो जीवः स जीवः केवलः शिवः । पाशबद्धः स्मृतो जीवः पाशमुक्तः सदाशिवः ॥ तुषेण बद्धो व्रीहिः स्यात्तुषाभावे हि तण्डुलः । कर्मबद्धः स्मृतो जीवः कर्ममुक्तः सदाशिवः ॥
जीव शिव है, शिव जीव है - वह जीव केवल शिव है। पाशों से बंधा हुआ 'जीव' माना जाता है और पाशों से मुक्त 'सदाशिव' कहलाता है। जिस प्रकार भूसी से युक्त धान होता है और भूसी के दूर हो जाने पर चावल कहलाता है, उसी प्रकार कर्मों से बँधा हुआ 'जीव' और कर्मों से छूटा हुआ 'सदाशिव' माना जाता है।
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