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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 38
देहो देवालयो देवि जीवो देवः सदाशिवः । त्यजेदज्ञाननिर्माल्यं सोऽहम्भावेन पूजयेत् ॥
हे देवि! देह देवालय है और जीव सदाशिव है। अज्ञानरूपी निर्माल्य को छोड़कर साधक को 'सोऽहं' भाव से पूजन करना चाहिए।
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