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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 36
मन्त्रोदकैर्विना सन्ध्यां पूजाहोमैर्विना तपः । उपचारैर्विना पूजां योगी नित्यं समाचरेत् ॥
मन्त्रोदक के बिना सन्ध्या, पूजा और होम के बिना जप - इस प्रकार योगी नित्य उपचारों के बिना पूजा करे।
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