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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 28
न पद्मासनतो योगो न नासाग्रनिरीक्षणम् । ऐक्यं जीवात्मनोराडुयोंगं योगविशारदाः ॥
योग के मर्मज्ञों ने जीव और आत्मा के ऐक्य को ही 'योग' कहा है। न पद्मासन से और न नासिका के अग्रभाग को देखने से योग होता है।
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