सम्प्राप्ते ज्ञानविज्ञाने ज्ञेये च हृदि संस्थिते ।
लब्धे शान्तिपदे देवि न योगो नैव धारणा ॥
ज्ञान विज्ञान के प्राप्त होने पर, हृदय में ज्ञेय की स्थिति होने पर और शान्ति पद के मिल जाने पर, हे देवि! न योग की आवश्यकता रहती है, न धारणा की।
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