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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 20
विदिते परमे तत्त्वे वर्णातीते ह्यविक्रिये । किङ्करत्वं हि गच्छन्ति मन्त्रा मन्त्राधिपैः सह ॥
वर्णों से अतीत परम तत्त्व को जान लेने पर सभी मन्त्र अपने अधिष्ठातृ देवताओं सहित साधक के दास बन जाते हैं।
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