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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 16
क्षीरोद्धृतं घृतं यद्वत्तत्र क्षिप्तं न पूर्ववत् । पृथक्कृतो गुणेभ्यः स्यादात्मा तद्वदिहोच्यते ॥
दूध से निकाला हुआ घी जैसे पुनः उसमें डालने से पहले जैसा मिश्रित नहीं होता, वैसे ही गुणों के द्वारा अलग की गई आत्मा इस संसार में अलग कही जाती है।
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