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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 15
यथा ध्यानस्य सामर्थ्यात् कीटोऽपि भ्रमरायते । तथा समाधिसामर्थ्याद् ब्रह्मभूतो भवेन्नरः ॥
जिस प्रकार ध्यान की शक्ति से कीड़ा भी भौरा बन जाता है, उसी प्रकार समाधि की शक्ति से मनुष्य ब्रह्मभूत हो जाता है।
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