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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 119
अश्वमेधायुतेनापि ब्रह्महत्यायुतेन च । पुण्यपापैर्न लिप्यन्ते येषां ब्रह्म हृदि स्थितम् ॥
जिन साधकों के हृदय में ब्रह्म स्थित है, वे अयुत अश्वमेघों को करके या अयुत ब्रह्महत्याओं से युक्त होकर भी उनके पुण्य या पापों से लिप्त नहीं होते।
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