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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 117
वृथैव यैः परित्यक्तं कर्मकाण्डमपण्डितैः । पाषण्डाः पण्डितम्मन्यास्ते यान्ति नरकं प्रिये ॥
हे प्रिये! जो मूर्ख व्यर्थ ही कर्म काण्ड को छोड़ देते हैं, वे पाखण्डी और अहङ्कारी नरक में जाते हैं।
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