क्रियमाणानि कर्माणि ज्ञानप्राप्तेरनन्तरम् ।
न च स्पृशन्ति तत्त्वज्ञं जलं पद्मदलं यथा ॥
ज्ञान हो जाने पर क्रियमाण कर्म तत्त्वज्ञ को स्पर्श नहीं करते, जिस प्रकार जल कमल की पंखुड़ियों से दूर रहता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।