स्वकार्येषु प्रवर्त्तन्ते करणानीति चिन्तयेत् ।
अहम्भावमपास्यैव यः कुर्यात् स न लिप्यते ॥
इन्द्रियां अपने कर्मों में लगी रहती हैं, ऐसा विचार कर जो अहंभाव को छोड़कर कर्म करते हैं, वे उनमें लिप्त नहीं होते।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।