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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 113
स्वकार्येषु प्रवर्त्तन्ते करणानीति चिन्तयेत् । अहम्भावमपास्यैव यः कुर्यात् स न लिप्यते ॥
इन्द्रियां अपने कर्मों में लगी रहती हैं, ऐसा विचार कर जो अहंभाव को छोड़कर कर्म करते हैं, वे उनमें लिप्त नहीं होते।
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