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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 110
कर्मणोन्मूलितेऽज्ञाने ज्ञानेन शिवतां व्रजेत् । शिवे तेनैव मुक्तिः स्यादतः कर्म समाचरेत् ॥
कर्म के द्वारा अज्ञान का उन्मूलन होने पर ज्ञान के द्वारा 'शिवत्व' की प्राप्ति होती है और शिव से ऐक्य स्थापित करने वाले की ही मुक्ति होती है। अतः कर्म का समुचित रूप से पालन करे।
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