ज्ञानी हो, चाहे अज्ञानी- सभी प्रकार से कर्म की मुक्ति के लिये, जब तक शरीर की स्थिति है, तब तक अपने अपने वर्ण और आश्रम के आचार का पालन करना चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।