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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 108
तस्मात् सर्वप्रयत्नेन सर्वावस्थासु सर्वदा । कुलधर्मरतो भूयात् कुलज्ञानिनमर्चयेत् ॥
अतः सब प्रयत्न करके, सभी अवस्थाओं में, सदैव कुलधर्म में तत्पर हो और कुलज्ञानी का अर्चन करे।
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