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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 106
यस्मिन् देशे वसेत् वीरः कुलपूजारतः प्रिये । सोऽपि देशो भवेत् पूतः किं पुनस्तत्पुरस्थिताः ॥
हे प्रिये! जिस देश में कुलपूजा करने वाला वीर निवास करता है, वह देश पवित्र हो जाता है। फिर उसके समक्ष रहने की महिमा क्या कही जाय।
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