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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 104
अनिखातविनिक्षिप्तमप्रयलेन वर्द्धितम् । परलोकस्य पाथेयं वीरचक्रेऽर्पितं मधु ॥
वीरचक्र में प्रयत्नपूर्वक अर्पित मधु परलोक के पथ को अनायास ही प्रशस्त करता है।
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