हे देवि! कुलनिष्ठों को छोड़कर जो अन्य को दान देता है, उसका वह दान निष्फल होता है और दान देने वाला नरक में जाता है। टूटे हुए बर्तन में जल, चट्टान में बोए हुये बीज और राख में किए गये हवन के समान अकौलिक को दिया गया दान व्यर्थ होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।