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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 10
न किञ्चिच्चिन्तनादेव स्वयं तत्त्वं प्रकाशते । स्वयं प्रकाशिते तत्त्वे तत्क्षणात्तन्मयो भवेत् ॥
किसी भी चिन्तन से तत्त्व प्रकाशित नहीं होता, वह स्वयं ही प्रकाशित होता है। तत्त्व के स्वयं प्रकाशित होते ही तत्क्षण उसमें तन्मय हो जाय।
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