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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 97
इति तत्त्वत्रयोल्लासपानभेदादि चोदितम् । समासेन कुलेशानि किं भूयः श्रोतुमिच्छसि ॥
इस प्रकार मैंने तीनों तत्त्व, उल्लास और पान के भेदादि का वर्णन संक्षेप में किया। अब हे कुलेशानि! आप क्या सुनना चाहती है?
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