स्त्रीणामन्यतमं स्थानं पुंसामन्यतमं पृथक् । अथवा मिथुनं कृत्वा क्रमात्समुपवेशयेत् ॥
पङ्क्त्याकारेण वा सम्यक् चक्राकारेण वा प्रिये । शिवशक्तिधिया सर्वे चक्रमध्ये समर्चयेत् ॥
चक्र में स्त्रियों और पुरुषों को चाहे अलग अलग स्थान में बिठावें या दम्पति के रूप में या पंक्ति में अथवा चक्राकार स्थान दे। हे प्रिये! शिवशक्ति के रूप में उन सबकी 'चक्र में पूजा करे।
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