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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 87
स्वर्गादिपुण्यलोकेषु देवादन्यद् यथा नहि । तथैव चक्रमध्येऽपि देवताः सर्वमानवाः ॥
स्वर्गादि पुण्य लोकों में जैसे देवताओं के अतिरिक्त अन्य कोई नहीं है, वैसे ही चक्र के मध्य में सभी मनुष्य देवता ही होते हैं।
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