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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 85
नागरि निर्झराद्यम्बु गङ्गां प्राप्य यथैकताम् । याति श्रीचक्रमध्येऽपि चैकत्वं सर्वमानवाः ॥
जिस प्रकार झरने आदि के जल गङ्गा में पहुँचकर समान भाव को प्राप्त करते है, उसी प्रकार श्रीचक्र में सभी मनुष्य एकत्व को प्रप्त करते हैं।
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