स्त्री वाथ पुरुषः षण्डश्चण्डालो वा द्विजोत्तमः ।
चक्रेऽस्मिन्नैव भेदोऽस्ति सर्वे शिवसमाः स्मृताः ॥
स्त्री हो या पुरुष, नपुंसक हो अथवा चाण्डाल हो या उत्तम द्विज, इस चक्र में कोई भेद नहीं रहता। वे सभी शिवसमान ही माने जाते हैं।
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