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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 83
प्रवृत्ते भैरवीचक्रे सर्वे वर्णा द्विजातयः । निवृत्ते भैरवीचक्रे सर्वे वर्णाः पृथक् पृथक् ॥
भैरवी चक्र में प्रविष्ट सभी वर्ण द्विजाति-वत् होते हैं, जातिभेद नहीं रहता । चक्र के समाप्त होने पर सभी वर्ण अलग अलग हो जाते हैं अर्थात् सामाजिक अनुशासन पुनः लागू हो जाता है।
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