आरम्भस्तरुणश्चैव यौवनं प्रौढमेव च । तदन्तो जाग्रदित्युक्तश्चोन्मनाः स्वप्न उच्यते ॥
समवस्था सुषुप्तिः स्यादवस्थात्रयसंयुता । सप्तोल्लासञ्च यो वेत्ति स मुक्तः स च कौलिकः ॥
१. आरम्भ, २. तरुण, ३. यौवन, ४, प्रौढ और ५. प्रौढान्त-ये उल्लास जाग्रत् कहे गये हैं। ६ उन्मना उल्लास स्वप्न है और ७ अनवस्था उल्लास सुषुप्ति है, जो तीनों अवस्थाओं से युक्त है। इन सातों उल्लासों को जो जानता है, वह मुक्त है और कौलिक है।
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