ब्रह्मध्यान के परमानन्द में तल्लीन होने वाले मनुष्य बड़े पुण्यवान् होते हैं। उस ध्यान के क्षण भर के लिए भी अन्तर्हित होने पर वे शोक करते हैं और हतप्रभ हो जाते हैं। सुख का यह महान् फल सातवें उल्लास से युक्त आपके भक्तों को मिलता है।
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