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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 74
सर्वोत्तीर्णा सदाऽहन्ता सामरस्यसमाकृतिः । अनयोल्लासिनो वीराः शिवा एव न संशयः ॥
यह मुद्रा सभी में श्रेष्ठ है। स्वाद और रूप का सामरस्य सदा इसमें अहन्त रहता है। इससे उल्लासित वीर साक्षात् शिव एवं शिवा ही हैं, इसमें सन्देह नहीं।
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