अन्तर्लक्ष्यो बहिर्दृष्टिर्निमेषोन्मेषवर्जितः ।
एषा तु शाम्भवी मुद्रा सर्वतन्त्रेषु गोपिता ॥
बाह्य दृष्टि निमेष (बन्द करना) और उन्मेष (खोलना) से रहित होकर लक्ष्य अन्तर्मुख हो जाता है। यही अधखुली आँखों वाली शाम्भवी मुद्रा है, जो सब तन्त्रों में गुप्त है।
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