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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 70
चक्ने मदाकुलान् दृष्ट्वा चिन्तयेद्देवताधिया । मोदते वन्दते भक्त्या स गच्छेत् योगिनीपदम् ॥ पश्यतेदेवम्विधं चक्रं यो भक्त्या कौलिकः प्रिये । व्रततीर्थतपोदानयज्ञकोटिफलं लभेत् ॥
चक्र में मदाकुल साधकों को देखकर देवताबुद्धि से ध्यान करे और प्रसन्न होकर भक्तिपूर्वक उनकी वन्दना करे। हे प्रिये! इस प्रकार से जो कौलिक चक्र का दर्शन भक्तिपूर्वक करता है, वह योगिनीपद को पाता है और करोड़ों व्रत, तीर्थ, तप, दान एवं यज्ञादि का फल प्राप्त करता है।
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