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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 69
तेभ्यो द्रोहं न कुर्वीत नाहितञ्च समाचरेत् । भक्त्या सत्कारयेदेतान् गोपयेच्च प्रयत्नतः ॥
न उनके प्रति द्रोह करे और न उनका अहित करे। भक्ति से उनका सत्कार करे और प्रयत्न करके उन्हें गुप्त रखे।
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