कौलिकान् भैरवावेशान् यो वा निन्दति मूढधीः ।
तं नाशयन्त्यसन्देहं योगिन्यः कुलनायिके ॥
हे कुलनायिके! भैरवावेश में आए कौलिकों की जो मूर्ख निन्दा करता है, उसका नाश योगिनियाँ करती हैं, इसमें सन्देह नहीं।
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