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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 61
मुखे आपूर्य मदिरां पाययन्ति स्त्रियः प्रियान् । उपदंशं मुखे क्षिप्त्वा निक्षिपन्ति प्रियानने ॥
मुख में मदिरा को भर कर स्त्रियों को पान कराते हैं। तीक्ष्ण तत्त्व को अपने मुख में डालते हैं और अपनी प्रिया के मुख में डालते हैं।
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