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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 59
मत्ता स्वपुरुषं मत्वा कान्तान्यमवलम्बते । तथैव पुरुषश्चापि प्रौढान्तोल्लाससंयुतः ॥
मतवाली कान्ता दूसरे को अपना पुरुष समझ कर उसका सहारा लेती है। उसी प्रकार प्रौढान्त उल्लास से युक्त पुरुष भी करता है।
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