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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 57
चक्रेऽस्मिन् योगिनो वीरा योगिन्यो मदमन्थराः । समाचरन्ति देवेशि यथोल्लासं मनोगतम् ॥
हे देवेशि! इस चक्र में वीर योगी और योगिनियाँ मादकता से शिथिल होकर अपने मन के उल्लास के अनुसार आचरण करते हैं।
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