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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 55
एतच्चक्रगता वीरा विज्ञेयाः परयोगिनः । येनाप्नुवन्ति मनुजाः साक्षाद्वैरवरूपताम् ॥
इस चक्र में प्रविष्ट होने वाले वीर परम योगी होते हैं, जिससे मनुष्य साक्षात् भैरव स्वरूप को प्राप्त करते हैं।
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